संघर्ष एवं परिवर्तन का काल : 11वीं और 12वीं शताब्दी
1. इस अध्याय में विचाराधीन कालखंड को भारतीय इतिहास में एक प्रमुख संक्रमण-काल क्यों माना जाता है? इस कालखंड से परिवर्तन और निरंतरता के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: यह कालखंड संक्रमण-काल था क्योंकि इस समय अनेक नए क्षेत्रीय राजवंशों और शक्तियों का उदय हुआ तथा राजनीतिक परिस्थितियों में परिवर्तन आया।
परिवर्तन:
(क) नए-नए क्षेत्रीय राजवंश शक्तिशाली हुए।
(ख) विभिन्न क्षेत्रों में नए राज्यों और राजधानियों का विकास हुआ।
निरंतरता:
(क) शिक्षा और संस्कृति की परंपराएँ बनी रहीं।
(ख) मंदिर निर्माण और धार्मिक परंपराएँ जारी रहीं।
2. पिछले अध्याय में चित्र 3.27 का निरीक्षण कीजिए और इसी प्रकार की ‘वंश परंपरा’ बनाइए जिसमें इस अध्याय में उल्लिखित सभी या अधिकांश वंश सम्मिलित हों।
उत्तर: इस अध्याय में उल्लिखित प्रमुख वंश हैं—
चोल → पूर्वी गंग → चंदेल → परमार → होयसल → काकतीय।
3. उपमहाद्वीप के मानचित्र पर इस अध्याय के अधिकांश या सभी वंशों को समाहित करते हुए एक भौगोलिक यात्रा-मार्ग अंकित कीजिए।
उत्तर: यात्रा-मार्ग इस प्रकार बनाया जा सकता है—
तंजावुर → गंगैकोंडचोलपुरम् → कांची → वारंगल → बेलूर → भोजपुर → कोणार्क।
ये स्थान इस अध्याय में वर्णित विभिन्न राजवंशों और उनके प्रमुख केंद्रों से संबंधित हैं।
4. भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के मानचित्र की सहायता से उस दूरी का अनुमान लगाइए, जो राजेंद्र प्रथम की नौसेना ने अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए की होगी?
उत्तर: राजेंद्र प्रथम की नौसेना ने बंगाल की खाड़ी को पार करके दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित श्रीविजय साम्राज्य तक यात्रा की। इसलिए यह एक लंबी समुद्री यात्रा थी।
5. निम्नलिखित युग्मों का मिलान कीजिए—
उत्तर:
(क) पूर्वी गंग — (iii) कोणार्क सूर्य मंदिर
(ख) चंदेल — (iv) कंदरिया महादेव मंदिर
(ग) परमार — (v) भोजेश्वर मंदिर
(घ) होयसल — (i) बेलूर
(ङ) चोल — (ii) बृहदीश्वर मंदिर
6. समूहों में कार्य करते हुए इस अध्याय में उल्लिखित वंशों की पिछले अध्याय के वंशों से तुलना कीजिए। एक सारणी बनाकर दोनों कालखंडों में विद्यमान वंशों, पूर्व कालखंड से लुप्त होने वाले वंशों तथा इस अध्याय के कालखंड में उभरने वाले वंशों की सूची बनाइए।
उत्तर: इस प्रश्न में पिछले अध्याय के वंशों की सूची से तुलना करने को कहा गया है। संलग्न दस्तावेज़ में उस पिछले अध्याय की पूरी सूची उपलब्ध नहीं है, इसलिए बाहर की जानकारी जोड़कर उत्तर नहीं बनाया गया है। प्रश्न में इस अध्याय के जिन वंशों का उल्लेख है, वे हैं— चोल, पूर्वी गंग, चंदेल, परमार, होयसल और काकतीय।
7. इस अध्याय और किसी अतिरिक्त पाठ्य-सामग्री का उपयोग करते हुए एक संक्षिप्त विवरण तैयार कीजिए जिसमें— (1) नालंदा जैसे शिक्षा-केंद्रों के महत्त्व; और (2) उनके विनाश के भारत की शिक्षा और संस्कृति पर पड़़े संभावित प्रभावों की व्याख्या हो।
उत्तर: नालंदा जैसे शिक्षा-केंद्र ज्ञान और शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र थे। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों तथा बौद्ध विहारों के विनाश से शिक्षा-केंद्रों को बहुत क्षति पहुँची और भारत में बौद्ध धर्म के पतन की प्रक्रिया और तेज हुई।
8. आपके अनुसार महमूद गज़नवी ने अफगानिस्तान से भारत में बार-बार आक्रमण क्यों किए जबकि मुहम्मद गोरी ने भारत में क्षेत्रीय विस्तार और दीर्घकालिक नियंत्रण स्थापित करने का लक्ष्य रखा? संक्षेप में लिखिए कि उसके उद्देश्यों ने उसके अभियानों के परिणामों को कैसे आकार दिया?
उत्तर: महमूद गज़नवी के अभियानों का उद्देश्य मुख्य रूप से धन प्राप्त करना और लूट करना था। इसलिए उसके आक्रमणों के बाद स्थायी शासन स्थापित नहीं हुआ। इसके विपरीत, मुहम्मद गोरी ने भारत में अपने क्षेत्र का विस्तार करने और दीर्घकालिक नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया। इसलिए उसके अभियानों का परिणाम भारत में उसके अधिकार के विस्तार के रूप में सामने आया।


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