प्रश्न 1. केरलम के कृषक चावल उगाते हैं जबकि पंजाब के कृषक अधिकतर गेहूँ उगाते हैं, क्यों? दोनों राज्यों के कृषक अपनी-अपनी फसलें बदल लें तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं?
उत्तर: केरल और पंजाब की जलवायु, मिट्टी तथा जल की उपलब्धता अलग-अलग है। केरल में मानसून और सिंचाई की पर्याप्त उपलब्धता के कारण चावल की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं, जबकि पंजाब में गेहूँ के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं।
यदि दोनों राज्यों के कृषक अपनी-अपनी फसलें बदल लें, तो फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है, क्योंकि नई फसल उस क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल नहीं हो सकती।
प्रश्न 2. निम्नलिखित का मिलान करें—
उत्तर:
| कॉलम (क) | कॉलम (ख) |
|---|---|
| (क) खरीफ फसलें | (ii) मानसून के समय उगाई जाने वाली फसलें |
| (ख) रबी फसलें | (i) शीत ऋतु में उगाई जाने वाली फसलें |
| (ग) जलोढ़ मृदा | (v) नदियों द्वारा जमा की गई पोषक तत्त्वों से समृद्ध मृदा |
| (घ) सीढ़ीदार कृषि | (vi) पहाड़ी ढलानों पर की जाने वाली कृषि पद्धति |
| (ङ) पर्वतीय मृदा | (iii) पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली पतली, खुरदरी और पथरीली मृदा |
| (च) जायद फसलें | (iv) ग्रीष्म ऋतु में उगाई जाने वाली फसलें |
प्रश्न 3. कुछ फसलें केवल विशिष्ट क्षेत्रों में ही क्यों अच्छी तरह विकसित होती हैं?
उत्तर: कुछ फसलें केवल विशिष्ट क्षेत्रों में इसलिए अच्छी तरह विकसित होती हैं क्योंकि फसलों की वृद्धि मिट्टी, जलवायु, तापमान, वर्षा, जल की उपलब्धता और स्थलाकृति जैसे कारकों पर निर्भर करती है। अलग-अलग क्षेत्रों में इन कारकों की स्थिति अलग होती है।
प्रश्न 4. आधुनिक प्रौद्योगिकी ने कृषकों की सहायता किस प्रकार की है?
उत्तर: आधुनिक प्रौद्योगिकी ने कृषकों की सहायता अनेक प्रकार से की है। अधिक उपज देने वाले बीज, सिंचाई का विस्तार, मशीनों और कृषि की नई तकनीकों के उपयोग से कृषि कार्य अधिक तेज और सुगम हुआ है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर तथा अन्य मशीनों ने कृषि कार्य को आसान बनाया है। परिष्कृत सिंचाई और डिजिटल तकनीक से भी कृषकों को सहायता मिलती है।
प्रश्न 5. संधारणीय कृषि क्यों आवश्यक है? इस पर एक छोटी टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: संधारणीय कृषि आवश्यक है क्योंकि यह पर्यावरण के लिए उपयोगी है और लंबे समय तक खेती को बनाए रखने में सहायता करती है। इसमें आधुनिक कृषि विधियों की उत्पादकता को पारंपरिक ज्ञान की विवेकशीलता के साथ मिलाया जाता है। जैविक कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग किया जाता है। इससे पर्यावरण पर होने वाले हानिकारक प्रभावों को कम किया जा सकता है।
प्रश्न 6. वर्तमान में कृषकों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, उनके नाम बताइए। इनका जन-सामान्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: वर्तमान में कृषकों को निम्नलिखित कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है—
छोटी भू-जोत।
जलवायु परिवर्तन।
आधुनिक कृषि उपकरणों का महँगा होना।
विपणन संबंधी चुनौतियाँ।
असमय वर्षा, गंभीर सूखा और अत्यधिक वर्षा जैसी प्रतिकूल घटनाएँ।
इन कठिनाइयों के कारण फसल नष्ट हो सकती है, किसानों को आर्थिक हानि हो सकती है और खाद्य उत्पादन तथा लोगों की आजीविका पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
प्रश्न 8. एक छोटा निबंध लिखिए जिसमें बताइए कि जब आपकी आयु 60 वर्ष होगी, तब कृषि कैसी हो सकती है।
उत्तर: जब मेरी आयु 60 वर्ष होगी, तब कृषि में आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग हो सकता है। संधारणीय कृषि में आधुनिक तकनीक को पर्यावरण-अनुकूल विधियों के साथ मिलाया जा सकता है। परिष्कृत सिंचाई, बूँद-बूँद सिंचाई और फुहारा सिंचाई जैसी विधियों से जल का कुशल उपयोग हो सकता है। कृषि में मशीनों और नई तकनीकों के उपयोग से कृषि कार्य अधिक सुगम हो सकता है। साथ ही प्राकृतिक और जैविक कृषि पद्धतियों को अपनाकर पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है।
प्रश्न 9. गंगा के बेसिन को प्रभावित करने वाली समस्याओं पर चर्चा कीजिए। अपने समाधान और उनके कारणों के साथ प्रस्तुति तैयार कीजिए।
उत्तर: गंगा के बेसिन की प्रमुख समस्याएँ हैं— हिमालय के हिमनदों का तेजी से पिघलना, सिंचाई के लिए बहुत अधिक पानी मोड़ना, कृषि और उद्योगों द्वारा भूमिगत जल का व्यापक दोहन तथा बाँधों द्वारा नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डालना।
इन समस्याओं के समाधान के लिए जल के उपयोग को नियंत्रित करना, भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन कम करना और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना आवश्यक है। इससे गंगा के बेसिन में खेती तथा लोगों की आजीविका और खाद्य-उत्पादन व्यवस्था को सुरक्षित रखने में सहायता मिलेगी।
प्रश्न 10. ‘अतीत की गूँज’ अनुभाग में उल्लिखित फसलों को देखकर बताइए कि आपके घर में कौन-कौन सी फसलें उपयोग में लाई जाती हैं? आप अपने अवलोकनों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर: ‘अतीत की गूँज’ में जौ, गेहूँ, चावल, तिल, उड़द तथा अनेक प्रकार की दालों और फलियों का उल्लेख मिलता है। मेरे घर में इनमें से चावल, गेहूँ, दालें और उड़द जैसी फसलों का उपयोग किया जाता है। इससे निष्कर्ष निकलता है कि प्राचीन समय से उगाई जाने वाली कई फसलें आज भी हमारे भोजन का हिस्सा हैं।


Leave a Reply