1.यदि आप पालों, प्रतिहारों और राष्ट्रकूटों के संघर्ष के समय कन्नौज में प्रवास करते तो आपका दैनिक जीवन किस प्रकार प्रभावित होता? शासकों के विषय में आपके आकलन को इसने कैसे बदला होता? कांचीपुरम में रह रहे अपने एक मित्र को इस विषय में एक पत्र लिखिए।
उत्तर:यदि मैं उस समय कन्नौज में रहता, तो पालों, प्रतिहारों और राष्ट्रकूटों के बार-बार होने वाले युद्धों के कारण मेरा दैनिक जीवन असुरक्षित और कठिन हो जाता। नगर में अशांति रहती और सामान्य जीवन प्रभावित होता। इस परिस्थिति से मुझे लगता कि शासकों के बीच कन्नौज पर अधिकार के लिए लगातार संघर्ष होता था और किसी एक को स्थायी विजय नहीं मिली।
2. इस काल में सम्राटों और राजाओं का नियंत्रण मुख्य क्षेत्रों पर ही होता था और अन्य क्षेत्रों का शासन अधीनस्थ प्रमुखों के द्वारा होता था। ऐसी व्यवस्था के क्या लाभ एवं क्या चुनौतियाँ रही होंगी?
उत्तर:
लाभ:
अधीनस्थ सामंत स्थानीय प्रशासन चला सकते थे।
वे सेना का नेतृत्व करते थे।
बड़े क्षेत्रों पर शासन करना आसान होता था।
चुनौतियाँ:
सामंतों की निष्ठा हमेशा स्थिर नहीं रहती थी।
केंद्रीय शासन कमजोर होने पर वे अधिक शक्तिशाली हो सकते थे।
कुछ सामंत अपने अधिपतियों को ही पराजित कर देते थे।
3. हूणों एवं अरबों के आक्रमण अपने उद्देश्यों, कार्यविधियों और उपमहाद्वीप पर पड़े प्रभावों की दृष्टि से किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर: हूण: हूण अनेक राजाओं के प्रतिरोध के बावजूद गंगा के मैदानों में प्रवेश कर गए। बाद में उन्हें पराजित कर दिया गया और सातवीं शताब्दी तक वे भारतीय समाज में पूरी तरह समाहित हो गए। कई हूण सैनिक बने और कुछ स्थानीय प्रशासन में कार्य करने लगे।
अरब: अरबों ने कई प्रयासों के बाद 712 ई. में सिंध पर विजय प्राप्त की। मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में सेना ने सिंध में प्रवेश किया और देबल पर अधिकार किया। बाद में स्थानीय शासकों ने विद्रोह करके अधिकांश क्षेत्रों पर फिर अधिकार कर लिया। अरबों की सिंध विजय का राजनीतिक और धार्मिक प्रभाव अन्य क्षेत्रों की तुलना में सीमित रहा।
4. कल्पना कीजिए कि आप प्रयाग महासभा के एक सामान्य नागरिक हैं। आपको हर्ष द्वारा अपनी अधिकांश संपदा दान करते हुए कैसा लगा?
उत्तर: मुझे हर्ष द्वारा अपनी अधिकांश संपदा दान करते देखकर बहुत आश्चर्य और प्रसन्नता हुई। मुझे उनका दानशील और उदार व्यवहार अच्छा लगा। प्रयाग में वे पाँच वर्ष में एक महासभा आयोजित करते थे और अपनी संपत्ति का बड़ा भाग बौद्धों, ब्राह्मणों तथा निर्ग्रन्थों को दान करते थे।
5. समूह बनाइए। प्रत्येक समूह में एक आलवार और एक नायनार का चयन कीजिए और उनके जीवन पर आधारित एक जीवनी, पोस्टर अथवा पुस्तिका तैयार कीजिए। इसमें उनकी जीवन-गाथाएँ एवं रचनाओं से एक या दो प्रतिनिधि कविताएँ (अनुवाद सहित) भी सम्मिलित कीजिए।
उत्तर: पाठ में 12 आलवारों का उल्लेख है, जो विष्णु के आराधक थे। उनमें आण्डाल नामक एक स्त्री भी थीं। 63 नायनार शिव के आराधक थे। पाठ में कराइकाल अम्मइयर को एक स्त्री नायनार संत के रूप में चित्रित किया गया है।
6. आपने ध्यान दिया होगा कि हमारे मानचित्रों में राज्यों की राजधानी और मुख्य नगरों के केवल प्राचीन नाम दर्शाए गए हैं। एक पेंसिल लेकर उनके मूल नामों के साथ उनके आधुनिक नाम लिखिए। भारत का वर्तमान मानचित्र लेकर इन नगरों को उसमें ढूँढ़िए।
उत्तर:
कांची — कांचीपुरम
तंजावुर — तंजावुर
मान्यखेत — मालखेड
उज्जयिनी — उज्जैन
कान्यकुब्ज — कन्नौज
7. शासक अथवा राजवंश का मिलान उसके नगर से कीजिए—
उत्तर:
(क) राष्ट्रकूट — (iii) मान्यखेत
(ख) गुर्जर-प्रतिहार — (iv) उज्जयिनी
(ग) चोल — (ii) तंजावुर
(घ) हर्षवर्धन — (v) कान्यकुब्ज
(ङ) पल्लव — (i) कांची


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