Short Questions with Answers
1. प्राकृतिक संसाधन क्या हैं?
उत्तर: प्रकृति में पाए जाने वाले वे पदार्थ और सामग्रियाँ जो मानव के लिए उपयोगी और मूल्यवान हों, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं।
2. प्रकृति कब संसाधन बन जाती है?
उत्तर: जब मानव प्रकृति की वस्तुओं का उपयोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है, तब वे संसाधन बन जाती हैं।
3. जीवन के लिए तीन आवश्यक प्राकृतिक संसाधन बताइए।
उत्तर: वायु, जल और भोजन।
4. नवीकरणीय संसाधन क्या हैं?
उत्तर: जो संसाधन प्राकृतिक रूप से पुनः उत्पन्न हो सकते हैं, वे नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं।
5. दो नवीकरणीय संसाधनों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर: सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा।
6. अनवीकरणीय संसाधन क्या हैं?
उत्तर: जो संसाधन बहुत लंबे समय में बनते हैं और जल्दी पुनः प्राप्त नहीं किए जा सकते, वे अनवीकरणीय संसाधन हैं।
7. दो अनवीकरणीय संसाधनों के नाम लिखिए।
उत्तर: कोयला और पेट्रोलियम।
8. पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ क्या हैं?
उत्तर: प्रकृति द्वारा प्रदान की जाने वाली वे सेवाएँ जो मानव को लाभ पहुँचाती हैं, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ कहलाती हैं।
9. भूजल के अत्यधिक दोहन का क्या परिणाम होता है?
उत्तर: भूजल स्तर घट जाता है और जल की कमी उत्पन्न होती है।
10. संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से क्या लाभ होता है?
उत्तर: संसाधन लंबे समय तक उपलब्ध रहते हैं और पर्यावरण सुरक्षित रहता है।
Long Questions with Answers
1. प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण कैसे किया जाता है?
उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण उनकी उपयोगिता और पुनः पूर्ति की क्षमता के आधार पर किया जाता है। इन्हें मुख्यतः नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों में बाँटा जाता है। नवीकरणीय संसाधन जैसे जल, सूर्यप्रकाश, पवन आदि पुनः प्राप्त किए जा सकते हैं, जबकि कोयला, पेट्रोलियम और धातुएँ अनवीकरणीय हैं।
2. जीवन के विभिन्न पक्षों और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मानव जीवन पूरी तरह प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। वायु से श्वसन, जल से प्यास बुझती है और भोजन से ऊर्जा मिलती है। घर, वस्त्र, वाहन और उद्योग भी संसाधनों से ही बनते हैं। इसलिए संसाधन जीवन का आधार हैं।
3. नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: नवीकरणीय संसाधन प्राकृतिक रूप से कम समय में पुनः उत्पन्न हो जाते हैं, जैसे सूर्य और पवन ऊर्जा। अनवीकरणीय संसाधन लाखों वर्षों में बनते हैं और समाप्त होने पर जल्दी वापस नहीं मिलते, जैसे कोयला और खनिज तेल। इसलिए इनका सावधानी से उपयोग आवश्यक है।
4. संसाधनों के असंधारणीय उपयोग से क्या समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?
उत्तर: अत्यधिक दोहन से संसाधन समाप्त होने लगते हैं, प्रदूषण बढ़ता है, जैव-विविधता घटती है और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इससे भविष्य की पीढ़ियों को कठिनाइयाँ होती हैं।
5. प्राकृतिक संसाधनों का असमान वितरण मानव जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर: संसाधनों का असमान वितरण उद्योगों, व्यापार और बस्तियों के विकास को प्रभावित करता है। जहाँ संसाधन अधिक होते हैं, वहाँ रोजगार बढ़ता है, जबकि कमी वाले क्षेत्रों में संघर्ष और निर्भरता बढ़ती है।
6. भूजल के अत्यधिक दोहन की समस्या को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: अधिक सिंचाई और पंपों के उपयोग से भूजल तेजी से घटता है। पुनर्भरण कम होने पर जल स्तर नीचे चला जाता है। इससे पानी की कमी और कृषि संकट उत्पन्न होता है।
7. पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ मृदा संरक्षण में कैसे सहायक हैं?
उत्तर: गोबर खाद, जैविक उर्वरक, फसल-चक्र और मिश्रित खेती से मृदा की उर्वरता बनी रहती है। ये तरीके रसायनों से होने वाले नुकसान को कम करते हैं और भूमि को स्वस्थ रखते हैं।
8. पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का महत्व बताइए।
उत्तर: वन ऑक्सीजन देते हैं, जल शुद्ध करते हैं और मृदा अपरदन रोकते हैं। ये सेवाएँ मानव जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ बनाती हैं। इनके बिना जीवन संभव नहीं है।
9. प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उपाय लिखिए।
उत्तर: जल-संचयन, वृक्षारोपण, पुनर्चक्रण, ऊर्जा की बचत, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण जैसे उपाय संसाधनों के संरक्षण में सहायक हैं।
10. संधारणीय विकास क्यों आवश्यक है?
उत्तर: संधारणीय विकास से वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रखे जा सकते हैं। इससे पर्यावरण संतुलित रहता है और दीर्घकालीन विकास संभव होता है।

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