1. प्रकृति और संसाधन का अर्थ
प्रकृति
- पर्यावरण में उपस्थित सभी
सजीव एवं निर्जीव तत्व
, जिन्हें मनुष्य ने नहीं बनाया, प्रकृति कहलाते हैं।
प्राकृतिक संसाधन
- जब मनुष्य प्रकृति के तत्वों का उपयोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु करता है, तब वे
संसाधन
कहलाते हैं।
उदाहरण
- वृक्ष → लकड़ी → फर्नीचर
- जल → पीने व सिंचाई
- कोयला → ऊर्जा उत्पादन
संसाधन बनने की आवश्यक शर्तें
- तकनीकी रूप से उपलब्ध
- आर्थिक रूप से लाभकारी
- सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य
2. प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता
मनुष्य की तीन मूलभूत आवश्यकताएँ:
- भोजन
- वस्त्र
- आवास
इन सबकी पूर्ति प्राकृतिक संसाधनों से होती है।
3. प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण
(A) जीवन के लिए आवश्यक संसाधन
ये संसाधन जीवन के अस्तित्व के लिए अनिवार्य हैं।
उदाहरण
- वायु
- जल
- मृदा
- भोजन
👉 इनके बिना जीवन संभव नहीं।
(B) सामग्री (Material) के लिए संसाधन
इनसे वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
उदाहरण
- लकड़ी
- धातुएँ (लोहा, ताँबा, सोना)
- संगमरमर
- कोयला
👉 इनसे घर, उपकरण, वाहन, फर्नीचर बनते हैं।
(C) ऊर्जा के लिए संसाधन
आधुनिक जीवन का आधार ऊर्जा है।
उदाहरण
- कोयला
- पेट्रोलियम
- प्राकृतिक गैस
- जल विद्युत
- सौर ऊर्जा
- पवन ऊर्जा
👉 बिजली, उद्योग, परिवहन के लिए आवश्यक।
4. नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधन
(A) नवीकरणीय संसाधन
जो प्रकृति द्वारा पुनः उत्पन्न हो सकते हैं।
विशेषताएँ
- जल्दी पुनः बनते हैं
- लंबे समय तक उपलब्ध
- यदि संतुलित उपयोग हो
उदाहरण
- सौर ऊर्जा
- पवन ऊर्जा
- जल
- वन
- मृदा
सावधानी
अत्यधिक दोहन से ये भी समाप्त हो सकते हैं।
(B) अनवीकरणीय संसाधन
जो लाखों वर्षों में बनते हैं और जल्दी समाप्त हो जाते हैं।
विशेषताएँ
- सीमित मात्रा
- पुनः बनना कठिन
- तेजी से समाप्त
उदाहरण
- कोयला
- पेट्रोलियम
- प्राकृतिक गैस
- धातुएँ
👉 विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक।
5. प्रकृति के पुनर्स्थापन और पुनर्जनन की प्रक्रिया
पुनर्स्थापन
क्षतिग्रस्त वस्तु का मूल अवस्था में लौटना।
पुनर्जनन
नई वृद्धि और जीवन का निर्माण।
उदाहरण
- वन में गिरे वृक्ष सड़कर मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं
- फिर नए पौधे उगते हैं
👉 प्रकृति में कोई अपशिष्ट नहीं होता।
6. पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ
प्रकृति द्वारा मनुष्य को मिलने वाले लाभ।
उदाहरण
- वृक्ष ऑक्सीजन देते हैं
- वन जल शुद्ध करते हैं
- मृदा अपरदन रोकते हैं
- पशुओं को आवास देते हैं
- फसलों का परागण
👉 ये सेवाएँ जीवन को सुरक्षित बनाती हैं।
7. संसाधनों का असंधारणीय (अतिशोषण) उपयोग
अर्थ
संसाधनों का अत्यधिक और बिना सोचे-समझे उपयोग।
दुष्परिणाम
- प्रदूषण
- मृदा क्षरण
- जल संकट
- जैव विविधता की हानि
- जलवायु परिवर्तन
8. प्राकृतिक संसाधनों का असमान वितरण
कारण
- भौगोलिक स्थिति
- जलवायु
- भू-आकृति
प्रभाव
- उद्योगों का विकास
- व्यापार वृद्धि
- रोजगार
- बस्तियों का विकास
- संसाधनों पर संघर्ष
👉 कई युद्ध संसाधनों के कारण हुए।
9. ‘संसाधन अभिशाप’
अर्थ
प्रचुर संसाधन होने के बावजूद आर्थिक विकास न होना।
कारण
- तकनीक की कमी
- उद्योगों का अभाव
- प्रबंधन की कमी
👉 संसाधनों का सही उपयोग जरूरी है।
10. भूजल दोहन – पंजाब का अध्ययन
समस्या के कारण
- हरित क्रांति
- अधिक सिंचाई
- मुफ्त बिजली
- रासायनिक उर्वरक
परिणाम
- भूजल स्तर बहुत नीचे
- जल प्रदूषण
- स्वास्थ्य समस्याएँ
- जल संकट
👉 अत्यधिक दोहन से भविष्य खतरे में।
11. मृदा संरक्षण
उपाय
- गोबर खाद
- कम्पोस्ट
- फसल चक्र
- बहु-फसलीकरण
- प्राकृतिक कीटनाशक
- पलवार
👉 मृदा उपजाऊ बनी रहती है।
12. जैविक खेती – सिक्किम का उदाहरण
अपनाए गए उपाय
- रसायन मुक्त खेती
- कम्पोस्ट खाद
- प्राकृतिक कीटनाशक
- मिश्रित फसलें
परिणाम
- उत्पादन बढ़ा
- किसानों की आय बढ़ी
- जैव विविधता बढ़ी
- राज्य 100% जैविक बना
👉 संधारणीय कृषि का सफल मॉडल।
13. उद्योगों से प्रदूषण
उदाहरण – सीमेंट उद्योग
- वायु प्रदूषण
- धूल से फेफड़ों को नुकसान
- जल व मृदा प्रदूषण
समाधान
- वैकल्पिक सामग्री
- प्रदूषण नियंत्रण तकनीक
- पर्यावरण अनुकूल निर्माण
14. नवीकरणीय ऊर्जा की आवश्यकता
कारण
- जीवाश्म ईंधन सीमित
- प्रदूषण कम करना
- भविष्य सुरक्षित बनाना
उपाय
- सौर ऊर्जा
- पवन ऊर्जा
- जल विद्युत
- स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएँ

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