प्रस्तावना
11वीं शताब्दी के बाद भारत में अनेक विदेशी आक्रमण, नए राजवंशों का उदय, राज्यों का पतन तथा लगातार युद्ध हुए।
इन घटनाओं के कारण:
- राजनैतिक सीमाएँ बदलीं
- नए साम्राज्य बने
- अर्थव्यवस्था और समाज में परिवर्तन आया
- भारतीय संस्कृति ने कठिनाइयों के बावजूद स्वयं को बनाए रखा
1️⃣ मध्यकाल की विशेषताएँ
- 11वीं से 17वीं शताब्दी का काल
- विदेशी तुर्क, अफगान और मुगल आक्रमण
- युद्ध, लूटपाट, सत्ता परिवर्तन
- क्षेत्रीय राज्यों का उदय
- व्यापार और कृषि का विकास
- धार्मिक संघर्ष व सहिष्णुता दोनों
2️⃣ दिल्ली सल्तनत
स्थापना
- 1192 में पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद
- तुर्क-अफगान शासकों का शासन
पाँच वंश
- ममलुक (गुलाम वंश)
- खिलजी
- तुगलक
- सैयद
- लोदी
प्रमुख विशेषताएँ
- निरंतर सैन्य अभियान
- मंदिरों और नगरों की लूट
- भारी कर वसूली
- उत्तराधिकार के लिए हिंसा
- जजिया कर लगाया गया
- राजनैतिक अस्थिरता
प्रमुख शासक
अलाउद्दीन खिलजी
- उत्तर व दक्षिण भारत में विस्तार
- मंगोल आक्रमण रोके
- भारी लूट से सेना मजबूत
- स्वयं को ‘द्वितीय सिकंदर’ कहा
मुहम्मद बिन तुगलक
- राजधानी दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित
- सांकेतिक मुद्रा (ताँबे के सिक्के)
- योजनाएँ असफल रहीं
- जनहानि और आर्थिक अव्यवस्था
तैमूर का आक्रमण
- दिल्ली में भयंकर नरसंहार
- लूटपाट और विनाश
- सल्तनत कमजोर हुई
3️⃣ सल्तनत का प्रतिरोध
प्रमुख प्रतिरोधी शक्तियाँ
- पूर्वी गंग राज्य (कोणार्क सूर्य मंदिर)
- मुसुनुरी नायक
- होयसल वंश
- मेवाड़ (राणा कुंभा)
- बहमनी सल्तनत
- गुजरात, बंगाल आदि क्षेत्रीय सल्तनतें
4️⃣ विजयनगर साम्राज्य
स्थापना
- हरिहर और बुक्का द्वारा
विशेषताएँ
- दक्षिण भारत का शक्तिशाली राज्य
- भव्य मंदिर, महल और स्थापत्य
- व्यापार का विकास
- विदेशी व्यापारियों का आगमन
कृष्णदेवराय
- सबसे प्रसिद्ध शासक
- साम्राज्य का विस्तार
- साहित्य, कला और संस्कृति को संरक्षण
- तेलुगु में ‘आमुक्तमाल्यदा’ की रचना
- मंदिर निर्माण
पतन
- 1565 तालीकोटा युद्ध
- दक्कन सल्तनतों से हार
- राजधानी का विनाश
- साम्राज्य छोटे भागों में बँट गया
5️⃣ मुगल साम्राज्य
स्थापना
- बाबर ने 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराया
बाबर
- तोपखाने का प्रयोग
- आत्मकथा ‘बाबरनामा’ लिखी
- कठोर विजेता
हुमायूँ
- राज्य बनाए रखने में कठिनाई
- शेरशाह सूरी का शासन
- बाद में पुनः सत्ता प्राप्त
अकबर (सबसे महत्वपूर्ण शासक)
विशेषताएँ
- विशाल साम्राज्य विस्तार
- जजिया कर समाप्त
- सुलह-ए-कुल नीति (सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता)
- राजपूतों से विवाह संबंध
- मनसबदारी प्रणाली
- संस्कृत ग्रंथों का फारसी अनुवाद
- प्रशासनिक सुधार
सांस्कृतिक योगदान
- महाभारत, रामायण, गीता का अनुवाद
- कला, चित्रकला, स्थापत्य का विकास
जहाँगीर व शाहजहाँ
- कला व वास्तुकला का उत्कर्ष
- महल, किले, स्मारक निर्माण
- ताजमहल का निर्माण (शाहजहाँ)
औरंगजेब
- साम्राज्य का अधिकतम विस्तार
- जजिया कर पुनः लागू
- मंदिरों का विनाश
- धार्मिक कठोरता
- दक्षिण में लंबे युद्ध
- राजकोष कमजोर
- मृत्यु के बाद मुगल शक्ति का पतन
6️⃣ मुगल साम्राज्य का प्रतिरोध
जाट
- कर व शोषण के विरुद्ध विद्रोह
आदिवासी
- भील, गोंड, संथाल, कोच
राजपूत
- राणा सांगा
- महाराणा प्रताप – हल्दीघाटी युद्ध
- गुरिल्ला युद्ध पद्धति
अहोम
- पाइक प्रणाली
- सरायघाट युद्ध में मुगलों की हार
7️⃣ सिखों का उदय
गुरु नानक
- समानता, भाईचारा, एक ईश्वर का संदेश
गुरु अर्जन देव
- शहीद
गुरु तेग बहादुर
- धर्म की रक्षा हेतु बलिदान
गुरु गोबिंद सिंह
- खालसा पंथ की स्थापना
- सिखों को सैन्य संगठन
परिणाम
- सिख शक्ति का उदय
- बाद में सिख साम्राज्य की स्थापना
8️⃣ प्रशासनिक व्यवस्था
दिल्ली सल्तनत
- सुल्तान सर्वोच्च
- इक्ता प्रणाली (कर वसूली हेतु क्षेत्र देना)
- कठोर कर प्रणाली
मुगल प्रशासन
- दीवान – वित्त
- मीर बख्शी – सेना
- खान-ए-सामान – शाही कार्य
- सदर – धार्मिक/शैक्षिक
- मनसबदारी प्रणाली
- जागीर प्रणाली
9️⃣ आर्थिक स्थिति
कृषि
- मुख्य आधार
- सिंचाई का विकास
- अनेक फसलें (चावल, गेहूँ, कपास, मसाले)
व्यापार
- समुद्री और नदी व्यापार
- प्रमुख बंदरगाह – कालीकट, सूरत, हुगली
- हुंडी प्रणाली
उद्योग
- वस्त्र निर्माण
- जहाज निर्माण
- हथियार, आभूषण, बर्तन
कठिनाइयाँ
- भारी कर
- अकाल
- किसानों की दयनीय स्थिति
- धन कुछ वर्गों तक सीमित
🔟 जनजीवन व संस्कृति
- मंदिर आर्थिक व सामाजिक केंद्र
- कला, संगीत, चित्रकला का विकास
- विभिन्न धर्मों का सहअस्तित्व
- सांस्कृतिक समन्वय

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