1. मराठा कौन थे?
- मराठा दक्कन पठार, विशेष रूप से
वर्तमान महाराष्ट्र
के निवासी थे। - वे
मराठी भाषा
बोलते थे, जिसका
12वीं शताब्दी से समृद्ध साहित्यिक इतिहास
रहा है। - मराठों ने भारत के इतिहास की दिशा को निर्णायक रूप से बदला और एक शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरे।
2. महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
- 13वीं शताब्दी में महाराष्ट्र पर
यादव वंश
का शासन था, जिनकी राजधानी
देवगिरि (दौलताबाद)
थी। - 14वीं शताब्दी में
खिलजी सल्तनत
ने यादवों को पराजित कर दिया। - राजनीतिक उथल-पुथल के बीच
भक्ति आंदोलन
निरंतर विकसित होता रहा।
3. भक्ति आंदोलन और मराठा समाज
- 7वीं से 17वीं शताब्दी के बीच संतों ने
भक्ति मार्ग
को महत्व दिया। - संतों ने
लोकभाषाओं
में भक्ति गीत और काव्य रचे। - महाराष्ट्र में प्रमुख संत:
- ज्ञानेश्वर
- नामदेव
- तुकाराम
- रामदास
- इन संतों ने उपनिषदों और भगवद्गीता का मराठी में अनुवाद किया।
- इससे समाज को
सांस्कृतिक एकता
मिली और मराठों को राजनीतिक रूप से संगठित होने में सहायता मिली।
4. स्वराज्य की अवधारणा
- 17वीं शताब्दी तक कुछ मराठा सरदारों ने स्वराज्य स्थापित करने का प्रयास किया।
- यह प्रयास
छत्रपति शिवाजी महाराज
के नेतृत्व में सफल हुआ। - शिवाजी ने मराठों को संगठित कर एक स्वतंत्र राज्य की नींव रखी।
5. शिवाजी का प्रारंभिक जीवन
- जन्म:
1630 ई.
, भोंसले कुल में - पिता: शाहजी
- माता: जीजाबाई
- पालन-पोषण पुणे में हुआ।
- जीजाबाई ने उन्हें धार्मिक, नैतिक और राजनीतिक शिक्षा दी।
- 16 वर्ष की आयु में शिवाजी ने सैन्य अभियानों की शुरुआत की।
6. मराठा शक्ति की स्थापना
- शिवाजी ने उपेक्षित और निर्जन
दुर्गों पर कब्ज़ा
कर उन्हें सुदृढ़ बनाया। - पुणे क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया।
- ‘
स्वराज्य
’ की अवधारणा राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों में विकसित हुई।
7. मराठा नौसेना की स्थापना
- पश्चिमी तट की सुरक्षा हेतु
1657 में मराठा नौसेना
की स्थापना की गई। - यह उस समय एक
क्रांतिकारी कदम
था। - मराठा नौसेना ने यूरोपीय नौसैनिक शक्ति को चुनौती दी।
- प्रमुख नौसैनिक दुर्ग:
सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग
8. गुरिल्ला युद्ध नीति
- शिवाजी ने
गुरिल्ला युद्ध पद्धति
अपनाई। - छोटे दल, तीव्र गति, अचानक आक्रमण इसकी विशेषताएँ थीं।
- अफ़ज़ल ख़ाँ को
प्रतापगढ़
में इसी रणनीति से पराजित किया गया। - ‘
वाघ-नख
’ का प्रयोग निकट युद्ध में किया गया।
9. मुगलों से संघर्ष
- शाइस्ता खाँ पर
रात्रिकालीन आक्रमण
किया गया (सर्जिकल स्ट्राइक जैसा)। - सूरत पर आक्रमण कर विशाल धन प्राप्त किया गया।
- धार्मिक स्थलों और निर्दोष लोगों को नुकसान नहीं पहुँचाया गया।
- पुरंदर की संधि के बाद शिवाजी को आगरा जाना पड़ा और वहाँ से
चतुराई से पलायन
किया।
10. राज्याभिषेक और विस्तार
- 1674 ई. में रायगढ़ दुर्ग
में शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ। - उपाधि:
श्री राजा शिव छत्रपति - नई संवत् प्रणाली:
राज्याभिषेक शक् - दक्षिण भारत में ‘
दक्षिण दिग्विजय
’ अभियान चलाया।
11. शिवाजी की मृत्यु और मूल्यांकन
- 1680 ई.
में बीमारी से निधन। - महान रणनीतिकार, दूरदर्शी शासक और प्रजावत्सल राजा थे।
- उनके आदर्शों ने अन्य भारतीय शासकों को प्रेरित किया।
12. शिवाजी के बाद मराठा
- संभाजी छत्रपति बने, परंतु मुगलों द्वारा यातनाएँ देकर हत्या कर दी गई।
- राजाराम ने जिंजी से संघर्ष जारी रखा।
- ताराबाई के नेतृत्व में मराठों ने मुगलों पर आक्रमण तेज किया।
- मराठा सत्ता धीरे-धीरे
विकेंद्रीकृत
हो गई।
13. पेशवा और मराठा विस्तार
- पेशवा (प्रधानमंत्री) का प्रभाव बढ़ा।
- बाजीराव प्रथम और नानासाहेब पेशवा ने अखिल भारतीय विस्तार किया।
- 1761 में पानीपत की हार के बाद भी मराठा शक्ति पुनः उभरी।
- 1771 में दिल्ली पर फिर से मराठा नियंत्रण हुआ।
14. आंग्ल-मराठा संघर्ष
- 1775 से 1818 के बीच
तीन आंग्ल-मराठा युद्ध
हुए। - आंतरिक कलह और अंग्रेजों की तकनीकी श्रेष्ठता के कारण मराठा शक्ति का अंत हुआ।
- अंग्रेजों ने भारत सबसे अधिक
मराठों से छीना
15. मराठा प्रशासन
(क) नागरिक प्रशासन
- वंशानुगत पद समाप्त।
- सभी अधिकारियों को राज्य कोष से वेतन।
- विधवाओं को पेंशन और पुत्रों को सैन्य पद।
(ख) अष्टप्रधान मंडल
- प्रधान (पेशवा)
- अमात्य
- सचिव
- मंत्री
- सेनापति
- सुमंत
- पंडितराव
- न्यायाधीश
16. राजस्व व्यवस्था
- चौथ
– 25% कर - सरदेशमुखी
– 10% अतिरिक्त - बदले में सुरक्षा प्रदान की जाती थी।
17. सैन्य प्रशासन
- सेना के तीन अंग:
- पैदल सेना
- घुड़सवार सेना
- नौसेना
- बारगीर और शिलेदार सैनिक।
- तलवार, भाले, बंदूकें और रॉकेटों का प्रयोग।
18. दुर्गों का महत्व
- दुर्ग मराठा राज्य की
आधारशिला
थे। - छापामार युद्ध और सुरक्षा में सहायक।
- रामचंद्रपंत अमात्य ने दुर्गों को राज्य का आधार बताया।
19. न्याय व्यवस्था
- पंचायतें न्याय का मुख्य अंग थीं।
- अपील की व्यवस्था थी।
- प्रमुख नगरों में कोतवाल तैनात।
20. व्यापार और परिवहन
- समुद्री व्यापार को बढ़ावा।
- मोचा, मस्कट, मलक्का से व्यापार।
- सड़कों, पुलों और नदी परिवहन का विकास।
21. सांस्कृतिक पुनरुत्थान
- मराठी और संस्कृत का प्रचार।
- मंदिरों का पुनर्निर्माण।
- राज्य-व्यवहार-कोष ग्रंथ की रचना।
- धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास।
22. शक्तिशाली मराठा महिलाएँ
ताराबाई
- साहसी योद्धा रानी।
- उत्तर भारत में मराठा विस्तार की सूत्रधार।
अहिल्याबाई होलकर
- कुशल प्रशासक और धर्मपरायण शासिका।
- मंदिरों, घाटों और कुओं का निर्माण।
- काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण।
23. मराठा विरासत
- मुगल प्रभुत्व को चुनौती।
- अंग्रेजों से पहले भारत का सबसे बड़ा भारतीय साम्राज्य।
- स्वराज्य की भावना से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरणा।

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