1. उपनिवेशवाद (Colonialism)
उपनिवेशवाद की परिभाषा
- जब एक शक्तिशाली देश किसी अन्य देश या क्षेत्र पर अधिकार कर लेता है।
- वहाँ अपनी
राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक व्यवस्था
लागू करता है। - स्थानीय जनता की स्वतंत्रता समाप्त कर संसाधनों का शोषण करता है।
- इस पूरी प्रक्रिया को
उपनिवेशवाद
कहा जाता है।
उपनिवेशवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- उपनिवेशवाद कोई नई प्रक्रिया नहीं थी।
- इसकी जड़ें
प्रथम सहस्राब्दी ईसा-पूर्व
के साम्राज्यों तक जाती हैं। - ईसाई और इस्लामी धर्म के प्रसार के साथ कई क्षेत्रों का उपनिवेशीकरण हुआ।
- 15वीं शताब्दी के बाद
यूरोपीय शक्तियों द्वारा उपनिवेशवाद तेज़ी से फैला।
2. औपनिवेशिक युग (15वीं शताब्दी के बाद)
- स्पेन, पुर्तगाल, ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड प्रमुख उपनिवेशवादी शक्तियाँ थीं।
- इन्होंने अफ्रीका, एशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत द्वीपों पर अधिकार किया।
- उपनिवेश स्थापित करने के लिए:
- सैन्य बल का प्रयोग
- मूल निवासियों का नरसंहार
- दास प्रथा
- सांस्कृतिक दमन किया गया
3. यूरोपीय शक्तियों को भारत की ओर आकर्षित करने वाले कारण
(क) आर्थिक कारण
- भारत मसाले, कपास, रेशम, हाथीदाँत, रत्न, चंदन, सागवान लकड़ी, वूट्ज़ स्टील आदि के लिए प्रसिद्ध था।
- भारत का विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग
25% योगदान
था। - भारत और चीन उस समय विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ थीं।
- भारत का आंतरिक और बाह्य व्यापार अत्यंत विकसित था।
(ख) राजनीतिक कारण
- यूरोपीय देशों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा।
- अधिक उपनिवेश बनाकर वैश्विक शक्ति बनने की इच्छा।
(ग) धार्मिक कारण
- स्थानीय जनसंख्या को ईसाई धर्म में परिवर्तित करना।
- इसे ‘सभ्य बनाने’ का माध्यम बताया गया।
(घ) वैज्ञानिक और भौगोलिक जिज्ञासा
- नए भूभागों की खोज।
- पृथ्वी के स्वरूप और प्राकृतिक इतिहास को समझना।
4. उपनिवेशवाद का वास्तविक स्वरूप
- उपनिवेशकों ने दावा किया कि उनका शासन
उन्नतिकारक
है। - उन्होंने स्थानीय लोगों को:
- असभ्य
- आदिम
- बर्बर बताकर उनका
असुरीकरण
किया।
वास्तविक परिणाम
- राजनीतिक स्वतंत्रता का ह्रास
- संसाधनों का अत्यधिक दोहन
- पारंपरिक जीवन-पद्धतियों का विनाश
- विदेशी संस्कृति और मूल्यों का आरोपण
- व्यापक निर्धनता और कष्ट
5. भारत में यूरोपीय शक्तियों का आगमन
(A) पुर्तगाली : व्यापार और उत्पीड़न
आगमन
- 1498 में
वास्को-डी-गामा
का कालीकट (कोझिकोड) आगमन। - भारत में यूरोपीय उपनिवेशीकरण की शुरुआत।
व्यापारिक और सैन्य नियंत्रण
- 1510 में गोवा पर अधिकार।
- गोवा भारत में पुर्तगालियों की राजधानी बना।
- मालाबार और कोरोमंडल तट पर व्यापारिक केंद्र।
कार्टेज प्रणाली
- समुद्र में चलने वाले हर जहाज को पुर्तगाली अनुमति अनिवार्य।
- बिना अनुमति जहाज जब्त कर लिए जाते थे।
- मसालों के व्यापार पर लगभग
100 वर्षों तक एकाधिकार
धार्मिक उत्पीड़न
- 1560 में गोवा में
धर्म-न्यायाधिकरण (इंक्विजिशन)
की स्थापना। - हिंदू, मुस्लिम, यहूदी और ईसाई धर्मांतरितों पर अत्याचार।
- बलात धर्मांतरण और मंदिरों का विध्वंस।
- यह व्यवस्था 1812 में समाप्त हुई।
(B) डच : वाणिज्य और प्रतिस्पर्धा
- 17वीं शताब्दी के आरंभ में भारत आगमन।
- मुख्य उद्देश्य: मसालों के व्यापार पर नियंत्रण।
- डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना।
प्रमुख केंद्र
- पश्चिमी तट: सूरत, भरूच, कोचीन
- पूर्वी तट: नागपट्टिनम, मसुलीपट्टनम
कोलाचल का युद्ध (1741)
- त्रावणकोर के राजा मार्तण्ड वर्मा ने डचों को पराजित किया।
- यह किसी एशियाई शक्ति द्वारा यूरोपीय शक्ति की दुर्लभ पराजय थी।
- इसके बाद भारत में डच प्रभाव समाप्त हो गया।
(C) फ्रांसीसी : औपनिवेशिक आकांक्षाएँ
- 1668 में सूरत में पहला व्यापारिक केंद्र।
- 1674 में पांडिचेरी में केंद्र।
- फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना।
डुप्ले की नीतियाँ
- भारतीय सैनिकों को यूरोपीय युद्ध-कौशल का प्रशिक्षण।
- सिपाही सेना का गठन।
- उत्तराधिकार विवादों में हस्तक्षेप।
- कठपुतली शासकों के माध्यम से शासन।
कर्नाटक युद्ध (1746–1763)
- ब्रिटेन और फ्रांस के बीच युद्ध।
- प्रारंभ में फ्रांसीसी सफल।
- अंततः ब्रिटिश विजय।
- फ्रांसीसी प्रभाव पांडिचेरी तक सीमित।
6. अंग्रेजों का प्रवेश और विस्तार
व्यापारिक कंपनी से साम्राज्यवादी शक्ति
- अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना।
- महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम से चार्टर।
- निजी सेना रखने का अधिकार।
- सूरत, मद्रास, बंबई और कलकत्ता में केंद्र।
7. ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति
- भारतीय शासकों की आपसी शत्रुता का लाभ।
- धार्मिक और सामाजिक विभाजनों को बढ़ावा।
प्लासी का युद्ध (1757)
- नवाब सिराजुद्दौला बनाम ईस्ट इंडिया कंपनी।
- मीर जाफर का विश्वासघात।
- कम सैनिकों के बावजूद अंग्रेजों की जीत।
- बंगाल पर कंपनी का नियंत्रण।
8. हड़प नीति (Doctrine of Lapse)
- उत्तराधिकारी न होने पर राज्य का विलय।
- दत्तक पुत्र परंपरा की अनदेखी।
- कई रियासतों का अंत।
- 1857 के विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार।
9. सहायक संधि (Subsidiary Alliance)
- ब्रिटिश रेजिडेंट की नियुक्ति।
- सुरक्षा के बदले ब्रिटिश सेना का खर्च।
- स्वतंत्र विदेश नीति समाप्त।
- वास्तविक सत्ता ब्रिटिशों के हाथ।
10. विनाशकारी अकाल
बंगाल का अकाल (1770–1772)
- कठोर कर नीति।
- फसल न होने पर भी कर अनिवार्य।
- लगभग एक करोड़ लोगों की मृत्यु।
अन्य अकाल
- 1876–78 का दक्कन अकाल।
- लगभग 80 लाख मौतें।
- अनाज का निर्यात जारी रहा।
- मुक्त बाजार नीति से स्थिति और खराब।
11. भारत की संपदा का निकास
- भारत से धन का बड़े पैमाने पर निष्कासन।
- ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति को बल।
- दादाभाई नौरोजी और रोमेश चंद्र दत्त के अध्ययन।
- 1765–1938 के बीच लगभग 45 ट्रिलियन डॉलर की लूट।
12. स्वदेशी उद्योगों का पतन
- भारतीय वस्त्र उद्योग विश्व प्रसिद्ध।
- ब्रिटेन में भारतीय वस्त्रों पर भारी कर।
- ब्रिटिश वस्तुओं पर भारत में कम कर।
- कारीगर बेरोज़गार और निर्धन।
- भारत का GDP योगदान घटकर 5%।
13. परंपरागत शासन प्रणालियों का विनाश
- ग्राम पंचायतों और स्थानीय स्वशासन की समाप्ति।
- केंद्रीकृत नौकरशाही की स्थापना।
- उद्देश्य: कर-संग्रह और नियंत्रण।
- न्याय प्रणाली महंगी और विदेशी भाषा में।
14. शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन
मैकॉले का शिक्षा प्रतिवेदन (1835)
- अंग्रेज़ी शिक्षा को प्राथमिकता।
- उद्देश्य:
- भारतीय हों, लेकिन सोच से अंग्रेज।
- पारंपरिक शिक्षा संस्थानों का पतन।
- समाज में स्थायी वर्ग विभाजन।

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