1. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise)
अर्थ
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
का अर्थ है कि
18 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक भारतीय नागरिक
मतदान करने का अधिकार रखता है। - सभी मतों का
समान मूल्य
होता है। - इसमें
जाति, धर्म, लिंग, भाषा, शिक्षा, आय, नस्ल
आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता।
भारत में मताधिकार
- पहले मतदान की आयु
21 वर्ष
थी। - 1988 में इसे घटाकर 18 वर्ष
कर दिया गया। - यह व्यवस्था
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326
में दी गई है।
विशेष तथ्य
- भारत में
कोई भी व्यक्ति किसी और की ओर से मतदान नहीं कर सकता - मतदान के लिए
मतदाता सूची में नाम दर्ज होना आवश्यक
है। - गंभीर अपराध में दोषी व्यक्ति को मतदान से वंचित किया जा सकता है।
- 2024 के आम चुनाव में लगभग
98 करोड़ मतदाता
मतदान के पात्र थे।
महत्व
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार:
- लोकतंत्र की
आधारशिला
है। - नागरिकों को
अपने प्रतिनिधि चुनने की शक्ति
देता है। - जनता को सरकार के प्रति
उत्तरदायी
बनाता है। - सभी नागरिकों को
राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में भागीदारी
देता है।
2. निर्वाचन प्रणाली (Electoral System)
निर्वाचन प्रणाली क्या है?
- वह
व्यवस्थित प्रक्रिया
, जिसके द्वारा नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। - इसमें कई परस्पर जुड़े तत्व मिलकर कार्य करते हैं।
निर्वाचन क्षेत्र
- वह क्षेत्र जहाँ के मतदाता किसी प्रतिनिधि को चुनते हैं।
- लोकसभा के लिए भारत को
543 निर्वाचन क्षेत्रों
में बाँटा गया है।
3. भारत की निर्वाचन प्रणाली की विशेषताएँ
- भारत
विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र
है। - विशाल जनसंख्या, भौगोलिक विविधता और सामाजिक विविधता के कारण चुनाव कराना एक बड़ा कार्य है।
- चुनाव को
निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी
बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की जाती हैं।
भागीदारी बढ़ाने के उपाय
- दिव्यांग और वृद्ध मतदाताओं के लिए:
- घर से मतदान
- डाक द्वारा मतदान
- ब्रेल मतपत्र
- रैंप और व्हीलचेयर की सुविधा
- इन उपायों से लोकतंत्र
समावेशी
बनता है।
4. भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI)
परिचय
- भारत निर्वाचन आयोग एक
स्वतंत्र संवैधानिक संस्था
है। - इसकी स्थापना
1950
में हुई। - स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव
1951–52
में हुए।
मुख्य कार्य
- चुनाव की
तिथियाँ घोषित करना - राजनीतिक दलों का पंजीकरण
- आदर्श आचार संहिता
लागू करना - पूरी चुनावी प्रक्रिया की
निगरानी
करना
संरचना
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त
- दो निर्वाचन आयुक्त
- राज्य स्तर पर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी - जिला स्तर पर
जिला निर्वाचन अधिकारी
5. मतदान की प्रक्रिया
लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान के चरण:
- मतदाता की पहचान और नाम की जाँच
- उंगली पर स्याही लगाना और हस्ताक्षर
- मतदाता पर्ची की जाँच
- ई.वी.एम.
के माध्यम से मतदान - वी.वी.पी.ए.टी.
से वोट की पुष्टि
ई.वी.एम. और वी.वी.पी.ए.टी.
- ई.वी.एम. से मतदान सरल और तेज होता है।
- वी.वी.पी.ए.टी. मतदाता को यह देखने का अवसर देता है कि उसका वोट सही दर्ज हुआ है।
6. आदर्श आचार संहिता
क्या है?
- चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के लिए नियमों का समूह।
उद्देश्य
- निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव
सुनिश्चित करना।
प्रमुख नियम
- चुनाव के समय नई सरकारी योजनाओं की घोषणा नहीं।
- वोट के बदले
उपहार या धन देना अपराध
है। - आपत्तिजनक भाषा और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग वर्जित है।
7. चुनावों के प्रकार
(क) लोकसभा और विधानसभा चुनाव
- प्रत्यक्ष चुनाव
होते हैं। - भारत में
“जो सबसे आगे, वही जीता” (First Past the Post)
प्रणाली लागू है। - 50% से कम मत पाकर भी प्रत्याशी जीत सकता है।
(ख) राज्यसभा चुनाव
- अप्रत्यक्ष चुनाव
होता है। - विधायक मतदान करते हैं।
- 233 सदस्य निर्वाचित, 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
- राज्यसभा एक
स्थायी सदन
है।
(ग) राष्ट्रपति का चुनाव
- आम जनता मतदान नहीं करती।
- निर्वाचक मंडल द्वारा चुनाव होता है।
- इसमें सांसद और विधायक शामिल होते हैं।
(घ) उपराष्ट्रपति का चुनाव
- संसद के सदस्य मतदान करते हैं।
- उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति होता है।
8. नोटा (NOTA)
- NOTA का अर्थ है
“उपरोक्त में से कोई नहीं” - यदि मतदाता किसी भी प्रत्याशी से संतुष्ट नहीं है तो यह विकल्प चुन सकता है।
- यह मतदाताओं की
असहमति को व्यक्त करने का लोकतांत्रिक तरीका
है।
9. चुनौतियाँ और आगे का मार्ग
प्रमुख चुनौतियाँ
- धन और बाहुबल का प्रभाव
- आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी
- शहरी क्षेत्रों में कम मतदान प्रतिशत
समाधान
- मतदाता जागरूकता
- शिक्षा और मीडिया की भूमिका
- युवाओं की सक्रिय भागीदारी

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