1. भूमिका / परिचय
- भारत को स्वतंत्रता लंबे संघर्ष और बलिदानों के बाद मिली।
- स्वतंत्रता के बाद सबसे महत्वपूर्ण कार्य
भारतीय संविधान
का निर्माण था। - संविधान ने देश के शासन के मूल सिद्धांत तय किए।
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार
के अंतर्गत 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार मिला। - जनता अपने प्रतिनिधियों का
प्रत्यक्ष चुनाव
करती है। - लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल सरकार बनाता है।
- संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है।
- 1952 में पहली लोकसभा बनी और जून 2024 में 18वीं लोकसभा का गठन हुआ।
2. भारतीय संसद की संरचना
भारतीय संसद तीन अंगों से मिलकर बनती है—
- राष्ट्रपति
- लोकसभा (निम्न सदन)
- राज्यसभा (उच्च सदन)
👉 इस व्यवस्था को
द्विसदनीय प्रणाली
कहा जाता है।
(क) लोकसभा
- जनता द्वारा
प्रत्यक्ष चुनाव
से चुनी जाती है। - अधिकतम सदस्य संख्या:
550 - सरकार लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
(ख) राज्यसभा
- सदस्यों का चुनाव
अप्रत्यक्ष रूप से
होता है। - राज्यों को प्रतिनिधित्व देने के लिए बनाई गई।
- इसकी संरचना संघीय व्यवस्था को मजबूत करती है।
3. भारत की संसदीय प्रणाली की विशेषताएँ
- यह प्रणाली
ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था
से प्रेरित है। - भारत
संघीय शासन प्रणाली
अपनाता है। - सत्ता का विभाजन—
- केंद्र
- राज्य
- स्थानीय सरकार
- उद्देश्य:
राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना
4. संसद के पीठासीन अधिकारी
- लोकसभा
→ अध्यक्ष (Speaker)- कार्यवाही का संचालन
- अनुशासन बनाए रखना
- राज्यसभा
→ उपराष्ट्रपति (सभापति)
सेंगोल
- स्वतंत्रता के समय सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक
- धर्मसम्मत और न्यायपूर्ण शासन का संकेत
- नई लोकसभा में सभापति की कुर्सी के पास स्थापित
5. संसद के प्रमुख कार्य
संसद के कार्य चार भागों में विभाजित हैं—
1️⃣ संवैधानिक कार्य
- राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का निर्वाचन
- संविधान में संशोधन
- संविधान के मूल मूल्यों की रक्षा
- शक्तियों का पृथक्करण सुनिश्चित करना
- संघीय व्यवस्था बनाए रखना
- मौलिक अधिकारों और नीति-निदेशक तत्वों की रक्षा
2️⃣ कानून निर्माण
- संसद का प्रमुख कार्य कानून बनाना है।
- कानून बनने से पहले उसका प्रारूप
विधेयक
कहलाता है।
विधेयक से कानून बनने की प्रक्रिया
- संसद के किसी एक सदन में प्रस्तुति
- विधेयक का वाचन
- स्थायी समिति को भेजा जाना (यदि आवश्यक हो)
- खंड-दर-खंड चर्चा
- मतदान
- दूसरे सदन में वही प्रक्रिया
- राष्ट्रपति की स्वीकृति
- राजपत्र में प्रकाशन
👉 उदाहरण:
निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009
3️⃣ कार्यपालिका संबंधी उत्तरदायित्व
- कानूनों को लागू करना
- सरकार का संचालन
- लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होना
- प्रश्नकाल
के माध्यम से जवाबदेही - संसदीय समितियों के सामने स्पष्टीकरण देना
4️⃣ वित्तीय उत्तरदायित्व
- वार्षिक बजट को स्वीकृति देना
- सरकारी व्यय पर निगरानी
- विभिन्न मंत्रालयों को धन का आवंटन
- यह सुनिश्चित करना कि जनता का धन सही ढंग से खर्च हो
6. संघीय कार्यपालिका
संघीय कार्यपालिका में शामिल हैं—
- राष्ट्रपति
- उपराष्ट्रपति
- प्रधानमंत्री
- मंत्रिपरिषद
👉 मंत्रिपरिषद संसद के सदस्यों में से चुनी जाती है और
सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी
होती है।
7. राष्ट्रपति
- राज्य का प्रमुख और औपचारिक कार्यपालिका अध्यक्ष
- प्रधानमंत्री व मंत्रियों की नियुक्ति
- संसद सत्र बुलाना
- विधेयकों को स्वीकृति देना
- विशेष परिस्थितियों में
विवेकाधीन शक्तियों
का प्रयोग
8. प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
- प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होते हैं।
- लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नियुक्त करता है।
प्रधानमंत्री के कार्य
- मंत्रिपरिषद का नेतृत्व
- मंत्रालयों में समन्वय
- राष्ट्रीय नीतियों का निर्धारण
- राष्ट्रपति को परामर्श देना
9. विधायिका और कार्यपालिका में अंतर
विधायिका
- कानून बनाती है
- सरकार के कार्यों की निगरानी करती है
- बजट को स्वीकृति देती है
कार्यपालिका
- कानून लागू करती है
- नीतियों का क्रियान्वयन
- विधायिका को जवाबदेह
10. न्यायपालिका की भूमिका
- कानूनों की व्याख्या
- विवादों का निपटारा
- मौलिक अधिकारों की रक्षा
- यह सुनिश्चित करना कि—
- संसद द्वारा बने कानून
- कार्यपालिका की कार्रवाइयाँसंविधान के अनुरूप हों
👉 इसे
नियंत्रण और संतुलन की प्रणाली
कहा जाता है।
11. राज्य स्तर पर विधायिका और कार्यपालिका
- प्रत्येक राज्य की अपनी
विधान सभा
होती है। - कुछ राज्यों में
विधान परिषद
भी होती है। - राज्य सरकार—
- राज्यपाल (औपचारिक प्रमुख)
- मुख्यमंत्री (वास्तविक प्रमुख)
12. संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची
- संघ सूची
→ केवल केंद्र - राज्य सूची
→ केवल राज्य - समवर्ती सूची
→ केंद्र और राज्य दोनों - यदि समवर्ती विषय पर केंद्र कानून बनाए → राज्य को मानना होगा
- उदाहरण: शिक्षा
13. विधायिका के सामने चुनौतियाँ
- सदस्यों की अनुपस्थिति
- कार्यवाही में बाधा
- प्रश्नकाल का बाधित होना
- चर्चाओं की गुणवत्ता में कमी
- घटती संसदीय उत्पादकता
14. नागरिकों की भूमिका
- जागरूक नागरिक लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।
- प्रश्न पूछना
- सार्वजनिक चर्चाओं में भाग लेना
- डिजिटल मंचों पर सहभागिता
- प्रतिनिधियों से संवाद

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