प्राकृतिक संसाधन एवंं उनका उपयोग
प्रश्न 1. आज जो संसाधन नवीकरणीय है, उसे कल अनवीकरणीय कैसे बनाया जा सकता है? कुछ ऐसे उपायों का वर्णन कीजिए जिनसे ऐसा होने से रोका जा सकता है।
उत्तर:
नवीकरणीय संसाधन वे हैं जो प्राकृतिक रूप से पुनः बन जाते हैं, जैसे जल, वन और मृदा। परंतु यदि इनका उपयोग उनकी पुनःपूर्ति की गति से अधिक किया जाए, तो ये भी समाप्त हो सकते हैं और अनवीकरणीय जैसे बन सकते हैं।
उदाहरण के लिए, यदि वनों की अंधाधुंध कटाई की जाए और नए पेड़ न लगाए जाएँ, तो वन समाप्त हो सकते हैं। इसी प्रकार यदि भूजल का अत्यधिक दोहन किया जाए और वर्षा जल का संचयन न हो, तो भूजल स्तर बहुत नीचे चला जाता है।
इसे रोकने के उपाय:
- वृक्षारोपण करना और वनों की कटाई पर नियंत्रण रखना।
- वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना।
- जल और अन्य संसाधनों का सीमित एवं विवेकपूर्ण उपयोग करना।
- प्रदूषण को कम करना और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) को अपनाना।
- लोगों में जागरूकता फैलाना।
प्रश्न 2. पाँच पारिस्थितिकी तंत्र कार्यों के नाम बताइए जो मानव के लिए उपयुक्त हैं।
उत्तर:
पारिस्थितिकी तंत्र के अनेक कार्य मानव के लिए लाभकारी हैं। इनमें से पाँच प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं —
- वायु को शुद्ध करना और ऑक्सीजन प्रदान करना।
- जल को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करना।
- मृदा अपरदन (कटाव) को रोकना।
- फसलों के परागण में सहायता करना।
- जीव-जंतुओं को भोजन और आवास प्रदान करना।
ये सभी कार्य मानव जीवन को संतुलित और सुरक्षित रखने में सहायक हैं।
प्रश्न 3. नवीकरणीय संसाधन क्या हैं? ये अनवीकरणीय संसाधनों से कैसे भिन्न हैं? लोग यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कर सकते हैं कि नवीकरणीय संसाधन हमारे और आने वाली पीढ़ियों के उपयोग के लिए उपलब्ध रहें? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नवीकरणीय संसाधन वे संसाधन हैं जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा समय के साथ पुनः उत्पन्न हो जाते हैं, जैसे सूर्य का प्रकाश, पवन, जल और वन।
अनवीकरणीय संसाधन वे हैं जो बहुत लंबी अवधि में बनते हैं और एक बार समाप्त होने पर जल्दी पुनः प्राप्त नहीं किए जा सकते, जैसे कोयला, पेट्रोलियम और धातुएँ।
भिन्नता:
- नवीकरणीय संसाधन पुनः बन सकते हैं, जबकि अनवीकरणीय संसाधन सीमित होते हैं।
- अनवीकरणीय संसाधनों के समाप्त होने पर उनका पुनः निर्माण बहुत कठिन या असंभव होता है।
उपाय:
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा का अधिक उपयोग करना।
- जल संरक्षण और वन संरक्षण करना।
- संसाधनों का अत्यधिक दोहन न करना।
उदाहरण:
- सौर ऊर्जा (नवीकरणीय) और कोयला (अनवीकरणीय)।
- वन (नवीकरणीय) और पेट्रोलियम (अनवीकरणीय)।
प्रश्न 4. अपने घर और पड़ोस में ऐसी सांस्कृतिक प्रथाओं की पहचान कीजिए जो प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की ओर इंगित करती हैं।
उत्तर:
हमारे घर और समाज में कई ऐसी परंपराएँ हैं जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देती हैं, जैसे —
- तुलसी या पीपल के पेड़ की पूजा करना।
- जल की बर्बादी न करना।
- वर्षा जल को एकत्र करना।
- त्योहारों में मिट्टी के दीयों का उपयोग करना।
- पुराने वस्त्रों और वस्तुओं का पुनः उपयोग करना।
- भोजन को व्यर्थ न जाने देना।
ये प्रथाएँ हमें संसाधनों का सम्मान करना सिखाती हैं।
प्रश्न 5. वर्तमान उपयोग के लिए वस्तुओं के उत्पादन में किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर:
वस्तुओं के उत्पादन के समय निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए —
- प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण और सीमित उपयोग किया जाए।
- उत्पादन प्रक्रिया से होने वाले प्रदूषण को कम किया जाए।
- अपशिष्ट पदार्थों का उचित निपटान और पुनर्चक्रण किया जाए।
- पर्यावरण-अनुकूल तकनीक का उपयोग किया जाए।
- भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए।
इस प्रकार हम संधारणीय विकास को बढ़ावा दे सकते हैं और पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्न (Page 1)
प्रश्न 1. हम प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण कैसे करते हैं?
उत्तर:
हम प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर करते हैं—
1. उपयोग के आधार पर
- जीवन के लिए आवश्यक संसाधन – जैसे वायु, जल और भोजन।
- सामग्री के लिए संसाधन – जैसे लकड़ी, लोहा, तांबा, पत्थर आदि।
- ऊर्जा के संसाधन – जैसे कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा।
2. नवीकरणीयता के आधार पर
- नवीकरणीय संसाधन – जो प्रकृति द्वारा पुनः उत्पन्न किए जा सकते हैं, जैसे सूर्य का प्रकाश, पवन, जल और वन।
- अनवीकरणीय संसाधन – जो लाखों वर्षों में बनते हैं और एक बार समाप्त होने पर जल्दी पुनः नहीं बनते, जैसे कोयला, पेट्रोलियम और खनिज।
इस प्रकार, प्राकृतिक संसाधनों को उनके उपयोग और पुनः निर्माण की क्षमता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
प्रश्न 2. जीवन के विभिन्न पक्षों और प्राकृतिक संसाधनों के वितरण के मध्य क्या संबंध है?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधनों का वितरण पृथ्वी पर समान नहीं है। इसका सीधा प्रभाव मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर पड़ता है।
जहाँ उपजाऊ भूमि और जल उपलब्ध होता है, वहाँ कृषि का विकास होता है और अधिक जनसंख्या बसती है।
- जहाँ खनिज और कोयले के भंडार होते हैं, वहाँ उद्योग स्थापित होते हैं और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
- संसाधनों के कारण व्यापार और परिवहन का विकास होता है।
- संसाधनों के असमान वितरण के कारण कभी-कभी राज्यों और देशों के बीच विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं।
इस प्रकार, प्राकृतिक संसाधनों का वितरण लोगों की आजीविका, बसावट, आर्थिक विकास और जीवन-स्तर को प्रभावित करता है।
प्रश्न 3. प्राकृतिक संसाधनों के असंधारणीय उपयोग/अतिशोषण से क्या आशय है?
उत्तर:
जब प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग उनकी पुनः पूर्ति की गति से अधिक किया जाता है, तो उसे असंधारणीय उपयोग या अतिशोषण कहते हैं।
उदाहरण के लिए—
- भूजल का अत्यधिक दोहन,
- वनों की अंधाधुंध कटाई,
- कोयला और पेट्रोलियम का अधिक उपयोग।
ऐसे उपयोग से संसाधन धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं, पर्यावरण प्रदूषित होता है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संकट उत्पन्न हो सकता है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।

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