मराठा साम्राज्य का उदय
1. विश्लेषण करें कि किस प्रकार भूगोल (विशेषकर पर्वत और समुद्र तट) ने मराठा सैन्य रणनीति और राज्य-निर्माण को निर्धारित किया।
उत्तर:
मराठों का क्षेत्र दक्कन का पठार, ऊँचे पर्वत, घने जंगल और लंबा समुद्र तट वाला था। पहाड़ों पर बने किले उन्हें प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते थे। इन किलों से वे दुश्मनों पर अचानक हमला करके फिर सुरक्षित स्थान पर लौट जाते थे। इसे गुरिल्ला युद्ध पद्धति कहते हैं। मुगलों की भारी-भरकम सेना पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से नहीं लड़ पाती थी।
समुद्र तट होने के कारण मराठों ने नौसेना बनाई। इससे वे अपने तटीय क्षेत्रों और व्यापार की रक्षा कर सके। समुद्री किलों ने यूरोपीय शक्तियों को चुनौती दी। इस प्रकार पर्वत और समुद्र दोनों ने मराठों की सैन्य शक्ति और राज्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. कल्पना कीजिए कि आप विद्यार्थियों के लिए किसी मराठा नेता की संक्षिप्त जीवनी लिख रहे हैं। किसी एक व्यक्तित्व (कान्होजी आंग्रे, बाजीराव प्रथम, महादजी शिंदे, अहिल्याबाई होलकर या ताराबाई) का चयन कीजिए और उनकी प्रेरणादायक विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए तीन-चार अनुच्छेद लिखिए। किसी एक चुनौती का वर्णन कीजिए जिस पर उन्होंने विजय प्राप्त की।
उत्तर:
अहिल्याबाई होलकर
अहिल्याबाई होलकर मराठा साम्राज्य की महान और आदर्श शासिका थीं। वे इंदौर राज्य की महारानी थीं। वे न्यायप्रिय, दयालु और धर्मपरायण महिला थीं। उन्होंने अपनी प्रजा की भलाई को सबसे अधिक महत्व दिया।
अपने पति और पुत्र की मृत्यु के बाद भी उन्होंने साहस नहीं खोया। उन्होंने स्वयं शासन की जिम्मेदारी संभाली और राज्य को सफलतापूर्वक चलाया। वे प्रतिदिन जनता की समस्याएँ सुनती थीं और तुरंत समाधान करती थीं।
उन्होंने काशी, सोमनाथ, रामेश्वरम आदि स्थानों पर मंदिरों, घाटों और कुओं का निर्माण कराया। उनकी सबसे बड़ी चुनौती थी – अकेले शासन करना और राज्य को सुरक्षित रखना। उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता और धैर्य से इस कठिनाई पर विजय प्राप्त की। इसलिए वे आज भी एक प्रेरणादायक महिला शासक मानी जाती हैं।
4. अध्याय में लिखा है कि अंग्रेजों ने भारत को मुगलों या किसी भी अन्य शक्ति से अधिक मराठों से छीना। आपके विचार में इसका क्या अर्थ है? अध्याय में दिए गए कौन-से प्रमाण इस विचार का समर्थन करते हैं?
उत्तर:
इस कथन का अर्थ है कि जब अंग्रेज भारत में अपनी सत्ता स्थापित कर रहे थे, उस समय मराठा साम्राज्य ही सबसे बड़ी और शक्तिशाली भारतीय शक्ति था। भारत के अधिकतर भाग पर मराठों का नियंत्रण था। इसलिए अंग्रेजों को भारत पर अधिकार करने के लिए सबसे अधिक संघर्ष मराठों से ही करना पड़ा। मुगल शक्ति पहले ही कमजोर हो चुकी थी, जबकि मराठे मजबूत और संगठित थे।
अध्याय में इसके कई प्रमाण दिए गए हैं। मराठों का शासन उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत तक फैल चुका था। उन्होंने दिल्ली, लाहौर और अटक जैसे क्षेत्रों पर भी नियंत्रण स्थापित किया था। अंग्रेजों और मराठों के बीच 1775 से 1818 के बीच तीन आंग्ल-मराठा युद्ध हुए। इन युद्धों के बाद ही ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मराठों को हराकर भारत के बड़े हिस्से पर अधिकार किया। इससे स्पष्ट होता है कि अंग्रेजों ने सबसे अधिक क्षेत्र मराठों से छीना और वे उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी थे।
5. तुलना कीजिए कि शिवाजी और उत्तरवर्ती मराठों ने धार्मिक स्थलों और विभिन्न धर्म के लोगों के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया। इस अध्याय में कौन-सा प्रमाण धार्मिक विविधता के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाता है?
उत्तर:
छत्रपति शिवाजी महाराज धार्मिक रूप से सहिष्णु और उदार शासक थे। वे अपने धर्म का पालन करते थे, लेकिन अन्य धर्मों का भी सम्मान करते थे। उन्होंने
सूरत पर आक्रमण के समय धार्मिक स्थलों को नुकसान नहीं पहुँचाया और निर्दोष लोगों की रक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को आदेश
दिया था कि जनता के साथ अन्याय न किया जाए। इससे उनकी मानवता और धार्मिक सहिष्णुता स्पष्ट होती है।
उत्तरवर्ती मराठों ने भी इसी नीति को अपनाया। अहिल्याबाई होलकर ने पूरे भारत में मंदिरों, घाटों और धर्मस्थलों का निर्माण व जीर्णोद्धार कराया। मराठों ने स्थानीय परंपराओं और सभी धर्मों का सम्मान किया तथा किसी पर धार्मिक भेदभाव नहीं किया।
प्रमाण:
- सूरत आक्रमण के समय धार्मिक स्थलों को सुरक्षित रखना।
- मंदिरों का पुनर्निर्माण और संरक्षण।
- सभी धर्मों के लोगों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार।
इससे स्पष्ट होता है कि शिवाजी और मराठे धार्मिक विविधता का सम्मान करते थे और सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखते थे।
6. इस अध्याय में वर्णित है कि मराठों के लिए दुर्ग ‘राज्य की आधारशिला’ थे। वे इतने महत्वपूर्ण क्यों थे? उन्होंने मराठों को शक्तिशाली शत्रुओं के विरुद्ध खड़े रहने में किस प्रकार सहायता की?
उत्तर:
मराठों के राज्य का अधिकांश भाग पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित था। इन पहाड़ों पर बने दुर्ग उन्हें प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते थे। दुर्ग ऊँचाई पर होने के कारण शत्रु आसानी से उन पर आक्रमण नहीं कर सकते थे। इसलिए दुर्ग मराठा राज्य की रक्षा का मुख्य आधार थे।
दुर्गों में सैनिकों के रहने, भोजन और पानी की व्यवस्था रहती थी। युद्ध के समय मराठा सैनिक दुर्गों में शरण लेकर अपनी शक्ति बचा लेते थे और अवसर मिलने पर अचानक हमला कर देते थे। इससे वे बड़ी और शक्तिशाली मुगल सेनाओं को भी पराजित कर पाते थे।
दुर्गों से आसपास के क्षेत्रों पर निगरानी रखना आसान था और महत्वपूर्ण मार्गों पर नियंत्रण बना रहता था। इसी कारण छत्रपति शिवाजी महाराज ने अनेक दुर्गों का निर्माण और संरक्षण कराया। इस प्रकार दुर्गों ने मराठों को लंबे समय तक शक्तिशाली शत्रुओं के विरुद्ध टिके रहने में सहायता की।
7. आपको मराठा सिक्कों का मुख्य अभिकल्पक (डिजाइनर) नियुक्त किया गया है। एक ऐसे सिक्के का रूपांकन कीजिए, जो मराठा उपलब्धियों और मूल्यों का प्रतिनिधित्व करे। अपने द्वारा चुने गए प्रतीकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
यदि मुझे मराठा सिक्कों का डिजाइन बनाने का अवसर मिले तो मैं ऐसा सिक्का बनाऊँगा/बनाऊँगी —
सिक्के का रूपांकन:
- सामने की ओर: “स्वराज्य” शब्द और शिवाजी की मुहर
- एक दुर्ग का चित्र
- एक जहाज (नौसेना का प्रतीक)
- सूर्य का चिन्ह
- देवनागरी लिपि में लेख
प्रतीकों की व्याख्या:
- दुर्ग → सुरक्षा और सैन्य शक्ति का प्रतीक
- जहाज → मराठा नौसेना और समुद्री व्यापार की शक्ति
- सूर्य → प्रगति, साहस और उज्ज्वल भविष्य
- स्वराज्य शब्द → स्वतंत्रता और आत्मनिर्भर शासन
यह सिक्का मराठों की वीरता, स्वतंत्रता, सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव को दर्शाएगा।
8. मराठा काल की इस भूमिका अध्ययन करने के पश्चात आपके विचार में भारतीय इतिहास में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्या था? अध्याय से उदाहरण लेकर अपने विचार का समर्थन करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए। अपने विचारों को सहपाठियों के साथ साझा कर उन पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
मेरे विचार में मराठा काल का भारतीय इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण योगदान स्वराज्य की स्थापना और विदेशी तथा मुगल सत्ता को चुनौती देना था। छत्रपति शिवाजी महाराज ने पर्वतीय दुर्गों, गुरिल्ला युद्ध नीति और संगठित प्रशासन के माध्यम से एक शक्तिशाली मराठा राज्य की नींव रखी। उन्होंने नौसेना बनाकर समुद्र तट की रक्षा की और जनता के हितों का ध्यान रखा। उनके बाद मराठों ने उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के बड़े भाग पर अपना प्रभाव स्थापित किया तथा अंग्रेजों जैसी विदेशी शक्तियों का मुकाबला किया। उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता, सुशासन और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को बढ़ावा दिया। इस प्रकार मराठों ने भारतीयों में आत्मविश्वास जगाया कि वे स्वयं अपना शासन चला सकते हैं, जो आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बना। इसलिए मराठों का योगदान भारतीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
महत्वपूर्ण प्रश्न (Page 61)
1. मराठा कौन थे? वे ब्रिटिश शासन स्थापित होने से पूर्व भारतवर्ष की सबसे बड़ी अखिल भारतीय शक्ति कैसे बने?
उत्तर:
मराठा दक्कन के पठार, विशेषकर वर्तमान महाराष्ट्र क्षेत्र के निवासी थे। वे मराठी भाषा बोलते थे और बहादुर, परिश्रमी तथा युद्धकौशल में निपुण थे। उनके नेता छत्रपति शिवाजी महाराज ने मराठों को संगठित कर स्वराज्य की स्थापना की।
शिवाजी ने पहाड़ी किलों, गुरिल्ला युद्ध नीति और मजबूत नौसेना की सहायता से मुगलों और अन्य शत्रुओं को पराजित किया। उनके बाद पेशवाओं और अन्य मराठा सरदारों ने उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत तक अपना साम्राज्य फैलाया। उन्होंने चौथ और सरदेशमुखी कर वसूलकर अपनी शक्ति बढ़ाई। इस प्रकार अंग्रेजों के आने से पहले मराठा भारत की सबसे बड़ी अखिल भारतीय शक्ति बन गए।
2. उनके शासन प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर:
मराठा शासन व्यवस्था सुव्यवस्थित और संगठित थी।
- शासन केंद्रीकृत था और सभी अधिकारी वेतनभोगी थे।
- ‘अष्टप्रधान मंडल’ नामक मंत्रिपरिषद राजा की सहायता करती थी।
- सेना में पैदल, घुड़सवार और नौसेना तीनों दल थे।
- दुर्गों का निर्माण कर सुरक्षा मजबूत की गई।
- प्रजा के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार किया जाता था।
- व्यापार, सड़कों और जल-व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया।
इस प्रकार मराठा शासन कुशल प्रशासन और प्रजा-कल्याण पर आधारित था।
3. भारतीय इतिहास पर मराठा साम्राज्य का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
मराठा साम्राज्य ने मुगल प्रभुत्व को चुनौती दी और भारत के बड़े भाग पर अपना नियंत्रण स्थापित किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं को बढ़ावा दिया। मंदिरों, घाटों और सार्वजनिक निर्माण कार्यों से समाज का विकास हुआ।
उन्होंने लोगों में स्वराज्य और आत्मविश्वास की भावना जगाई। उनके संघर्ष ने आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन की नींव रखी। इसलिए मराठा साम्राज्य का भारतीय इतिहास पर बहुत गहरा और महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा।

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